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rashi

Vedic astrology is something which can unfold the knowledge of the planets and the stars; there influence on an individual or human life. Humans are the creation of the cosmos. Therefore, all the facets of human existence, including the past, present and future are intimately connected to the influence of the planets and the stars. The Moon being nearest to the earth exercises much influence on it. The Sun as the central figure predominates over the entire arrangement of the celestial system. According to Vedic spiritual traditions, consciousness is not something that comes about merely through the functioning of neural connections in the brain but is a basic characteristic of all reality, a spirit pervading all manifestations. The role of the human nervous system is to provide an appropriate material structure to individualize consciousness. In other words, we are the tuners of the all-pervading field of cosmic awareness. The discoveries of modern quantum physics seem, therefore, to parallel Vedic conjectures about the nature of reality.


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!! कालसर्प दोष एवं ग्रह शांति यज्ञ !!


05-August-2019

कालसर्प योग एवं गृह शांति यज्ञ



स्थान - गौरी शंकर मंदिर मसरानी लेन हलाव पूल कुर्ला पश्चिम मुंबई - ७०


मानव जीवन में कालसर्प का प्रभाव

कालसर्प योग में उत्पन्न जातक को मानसिक अशांति,धन प्राप्ति में बाधा,विवाह विलम्ब ,संतान अवरोध, गृहस्थी में प्रतिपल कलह बना रहता है! प्रायः जातक को बुरे स्वप्ना भी आते है कुछ न कुछ अशुभ होने की आशंका रहती है! जातक को अपनी क्षमता, कार्य कुशलता का पूर्ण फल नहीं मिल पता है! कार्य अक्सर विलम्ब से पूर्ण होते है! अचानक नुकसान एवंम प्रतिष्ठा की क्षति, इस योग का विशेष लक्षण है इस योग में जातक के प्रगति में पग -पग पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है! इस योग के द्वारा जातक को आर्थिक व्यावसायिक एवं मानसिक उलझन से मुक्त नहीं होने देता है! पूरा प्रयत्न करने पर भी किसी न किसी मुसीबत में फसा रहता है! वह सारा जीवन दूसरों के कार्य को सफल करता है! जिनकी वह सहायता करता है वह शिखर छूने लगते है! परन्तु कालसर्प योग से प्रभावित जातक जो भी प्रयास या प्रयत्न करता है स्वयं उसमे सफल नहीं हो पाता है इस योग से प्रभावित व्यक्ति बिपत्ति के समय जिनकी तन मन से सहायता की होती है समय वे ही उनके काम नहीं आते है! जिनकी कुंडली में यह योग होता है! उसकी शांति आवश्यक है करा लें नहीं तो भले ही कितनी उचाई पर पहुच जाय एक न एक दिन जमीन पर आना ही होगा



क्या है कालसर्प योग

कालसर्प योग एक ऐसा योग है जो जातक के पूर्व जन्म के किसी जघन्य अपराध के दण्ड या श्राप के फलस्वरुप उनकी कुण्डली में परिलक्षित होता है । व्यावहारिक रुप से पीड़ित व्यक्ति आर्थिक व शारीरिक रुप से परेशान तो होता ही है धनाड्य घर मे पैदा होने के बावजूद किसी न किसी वजह से उसे अप्रत्याशित रुप से आर्थिक क्षति होती रहती है।

किस प्रकार होता है काल सर्प योग:-

राहु एवं केतु के अंतर्गत सारे ग्रह विद्यमान होने पर यह योग बनता है प्राचीन धार्मिक ग्रन्थो में राहु का अधिदेवता काल एवं प्रत्यधि देवता सर्प माना जाता है, किसी भी ग्रह की पूजा के लिए उस ग्रह के अधिदेवता एवं प्रत्यधि देवता का भी पूजन आवश्यक माना जाता है। इसलिए राहु एवं केतु की शान्ती के लिए 'कालसर्पयोग' अनिवार्य माना गया है। वास्तव मे राह और केतु का छाया ग्रह है, राहु का जन्म भरणी नक्षत्र एवं केतु का जन्म श्लेषा नक्षत्र है। राहु का जन्म भरणी नक्षत्र के देवता काल और श्लेषा नक्षत्र के देवता सर्प ज्योतिष के आधार पर ईसी योग को काल सर्प योग कहते है। यदि सभी सातों ग्रह राहु एवं केतु के मध्य मे है या अंशानुसार क्रम अथवा वक्र स्थिति में कुछ ग्रह राहु केतु की धुरी से बाहर हो तो भी काल सर्प योग से प्रभावी ब्यक्ति होता है। यह योग मूलतः बारह प्रकार का कालसर्प योग होकर व्यक्ति के जीवन मे अनेक प्रकार की समस्याएं आती है जिनमें व्यक्ति उलझा रहता है।

नीचे कुछ ज्योतिषीय स्थितियॉ दी जा रही है जिनमें काल सर्प योग तीव्रता से सम्बंधित जातक को पेरशान किया करता है।

  • बिमारी सताती है उसे हमेशा लगता है कि कोई हमे नुकसान पहुॅचा सकता है या वह व्यक्ति मानसिक तौर पर पीड़ित रहता है।
  • जब काल सर्प योग में राहु के साथ शुक्र की युति हो तो जातक को सन्तान सम्बन्धी ग्रह बाधा होती है।
  • जब लग्न व लग्नेश पीड़ित हो तब भी जातक मानसिक रुप से परेशान रहता है।
  • चन्द्रमा से द्वितीय व द्वादश भाव में कोई ग्रह न हो यानी केमदु्रम योग हो और चन्द्रमा या लग्न से केन्द्र में कोई ग्रह न हो तो जातक को मुख्य रुप से आर्थिक परेशानी होती है।
  • जब राहु के साथ गुरु. की युति हो तब चाण्डाल योग के कारण जातक को तरह - तरह के अनिष्टों का सामना करना पडता है।
  • जब राहु की मंगल से युति यानि अंगारक योग हो तब जातक को भारी कष्ट का सामना करना पडता है।
  • जब राहु के साथ सूर्य या चन्द्रमा की युति हो तो ग्रहण योग के प्रभाव से जातक पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है शारीरिक व आर्थिक परेशानियॉ बढती हं।
  • जब राहु के साथ शनि की युति यानि नन्द योग हो तब भी जातक के स्वास्थ्य व संतान पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है तथा उसकी कारोवारी परेशानियॉँ बढती है
  • जब राहु से बुध की युति यानि जड़ त्व योग हो तब भी जातक पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है उसकी आर्थिक व सामाजिक परेशानियॉं बढती है।
  • जब अष्टम भाव में राहु पर मंगल, शनि या सूर्य की दृष्टी हो तब जातक के विवाह में विध्न या देरी होती है।

जब तक कि कोई सही सलाहकार न मिल जाए ब्यक्ति मेहनत करता रहता है पर उसे पूर्ण फल नही मिल पाता आईए देखें किस प्रकार की समस्याएं कालसर्प दोष के कारण आती है।

ब्यापारिक समस्याएं ब्यापार सही तरह से पनपता नही।
शादी की समस्याएं लडके या लडकी की शादी में रुकावट आती है
बिमारी की समस्याएं कोई न कोई बिमारी लगी रहती है।
औद्योगिक समस्याएं उद्योग सही तरीके से नही चलता है।
व्यक्तिगत समस्याएं व्यक्ति खुद अपने आप से असन्तुष्ट रहता है।
भाग्योदय की समस्याएं भाग्योदय न होने के कारण कदम कदम पर समस्याएं आती है।
शिक्षा सम्बधित समस्याएं शिक्षा भी पूर्ण नही होती फिर भी बहुत वाधाएं आती है।
मान सम्मान की समस्याएं समाज में जितना मान सम्मान मिलना चाहिए उतना नहीं मिल पाता है।
नौकरी की समस्याएं नौकरी मिलने मे परेशानी होती है तथा अनुकूल नौकरी नही मिल पाती है।

उक्त प्रकार की परेशानियाँ कालसर्प की वजह से होती है, परन्तु याद रहे कालसर्प योग वाले सभी जातकों पर इस योग का समान प्रभाव नही पडता किस भाव में कौन सी राशि अवस्थित है और उसमें कौन कौन सा ग्रह कहॉँ बैठा है उसका प्रभाव जातक पर कितना है, इसलिए मात्र काल सर्प योग सुनकर भय भीत हो जाने की जरुरत नही है बल्कि उसका ज्योतिषिय विश्लेषण करवा कर उसके प्रभावों की विस्तृत जानकारी करना ही बुध्दिमत्ता कही जायेगी।